उत्तर प्रदेशबस्ती

अवैध कटान पर वन विभाग की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, माफियाओं में मचा हड़कंप! ‘रात के अंधेरे में आरी’ चलाने वाले सावधान! ओड़वलिया में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई।

क्या पुलिस-प्रशासन का संरक्षण था अवैध कटान को? ओड़वलिया कांड के बाद उठे तीखे सवाल! बस्ती: शीशम की बलि, माफियाओं की चांदी! रेंजर सोनल वर्मा की कार्रवाई से माफियाओं की उड़ी नींद। सरकारी परमिट दरकिनार, पेड़ों का खुला व्यापार: बस्ती में लकड़ी माफियाओं के खिलाफ पहली बड़ी नजीर।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती में ‘हरित हत्यारों’ पर वन विभाग का प्रहार: रुधौली के ओड़वलिया में माफियाओं की उड़ी नींद

  • रुधौली में ‘हरित माफिया’ पर चला रेंजर का डंडा: शीशम कटान पर जमीन मालिक और माफिया पर मुकदमा!
  • सरकारी परमिट दरकिनार, पेड़ों का खुला व्यापार: बस्ती में लकड़ी माफियाओं के खिलाफ पहली बड़ी नजीर।

बस्ती: रुधौली थाना क्षेत्र के करमा कला स्थित ओड़वलिया गांव में रातों-रात दर्जनों हरे-भरे शीशम के पेड़ों को काटकर धराशायी करने का मामला अब वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए नाक का सवाल बन गया है। सोशल मीडिया पर अवैध कटान और लकड़ी की ढुलाई का वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आई रामनगर रेंज की टीम ने आखिरकार माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

क्या है मामला?

​ओड़वलिया गांव में प्रतिबंधों को धता बताते हुए बिना किसी परमिट के बेशकीमती शीशम के पेड़ों की खुलेआम बलि दे दी गई। देर रात तक चलती आरी की आवाजें और दिन के उजाले में लदी हुई लकड़ियों की ट्रॉलियों ने इस पूरे खेल को उजागर कर दिया। मामला तूल पकड़ते ही रामनगर रेंजर सोनल वर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए जमीन मालिक छेदी और लकड़ी माफिया नोमान अहमद के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।

साठगांठ के आरोपों से सवालों के घेरे में विभाग

​इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप तो मचा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का सफाया स्थानीय पुलिस और वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। लंबे समय से चल रहे इस खेल को लेकर प्रशासनिक संरक्षण के सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या यह मुकदमा केवल खानापूर्ति है या फिर रसूखदार माफियाओं की कमर तोड़ने की शुरुआत? यह बड़ा सवाल अब भी जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब प्रशासन दिखाएगा कड़ा रुख?

​रेंजर सोनल वर्मा की इस त्वरित कार्रवाई ने लकड़ी माफियाओं के बीच एक संदेश जरूर भेजा है कि अब ‘खेल’ इतना आसान नहीं होगा। ‘देर रात की आरी’ का यह मामला अब एक नजीर बन गया है। प्रशासन की ओर से अब स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि सरकारी अनुमति के बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।

चेतावनी: प्रकृति का संतुलन बिगाड़कर कमाई करने वाले माफियाओं को अब यह समझ लेना चाहिए कि अवैध कटान का उनका यह काला कारोबार अब अधिकारियों के रडार पर है। यदि समय रहते वन विभाग की पैनी नजर इसी तरह बनी रही, तो शायद बस्ती के पर्यावरण को इन ‘हरित हत्यारों’ से बचाया जा सकेगा।

 

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